संदेश

फ़रवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संक्रमण काल

परिवर्तन

मैं कब बड़ा हो गया

मुझ पर हँसते हैं सब

मैं अपूर्ण हूँ तुम बिन..

हे तेज के अनन्त श्रोत..

जल

यादों के नगर में

जिनगी के संगी

मौत

लो आया फागुन

लइकापन के सुरता

किसान

वो क्या खूब जमाना था।

पत्नि के लिए

टॉमी

भोर

तुम याद आ जाते हो

ईश्वर के लिए

इहि जिनगी ए

छेरछेरा पुन्नी के मेला

आज सुरहुत्ति ए

दूकाल 2017

अपन भाखा

सरसती बन्दना

दारू के ब्याधी