मौत
# मौत
मौत तेरा जिक्र भी न एक बार करता हूँ।
तुम हो आखरी सच इकरार करता हूँ।।
तुम रहते हो मेरे आसपास ही लेकिन,
क्यूँ बचने की कोशिश बेकार करता हूँ।
किसी अजीज के दुनिया छोड़ जाने पर,
सहम जाता हूं,गौर से तेरा दीदार करता हूँ।
ये जंगल है न जाने किधर से आ जाए तू,
तेरा शिकार हूँ, तेरा इंतजार करता हूँ।
अक्सर चलता हूं ,अकड़ कर दुनिया मे,
तुझसे डरता हूँ ,मगर डरने से इनकार करता हूँ।
जानता हूं छोड़ देगी जिंदगी मेरा साथ,
नादां हूं, फिर भी जिंदगी से ही प्यार करता हूँ।
©आशुतोष साहू
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