ईश्वर के लिए

#ईश्वर के लिए#

ईश्वर !तुमने हमे बनाया,
कहते हैं, सभी,
ये सारी सृष्टि,
जल, जंगल, पृथ्वी,
पर्वत सभी।

मगर मैं, मन के भीतर तुम्हें बनाता हूँ।
यदि आवश्यकता न हो तो नकार देता हूं।

जब रात में डर लगता है,
भूत प्रेत की बात ,
आती है याद,
कुछ गड़बड़ लगता है।
तुम्हे स्मरण करता हूं,
और कहता हूं तुम हो।

जब दूसरे धर्म के लोग,
कहते है तुम नही हो,
मैं मजबूती से कहता हूं ,
तुम हो।

जब बुराई मुझ पर हक जमाती है,
मैं तुम्हे ही सामने करता हूँ,
और तुम मुझे बचा लेते हो।

मगर कभी लगता है,
तुम कहीं नही हो,
यदि होते तो कही तो दिखते, कही तो मिलते।

✍️©आशुतोष साहू

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