दूकाल 2017
# दूकाल
पउर होगे, परिहार होगे, उही धोखा ऑसों के साल होगे।2।
झन परै, झन परै कहत राहीगेव,फेर ऑसों तको दुकाल होगे।।
*मेहनत सबो बिरथा होगे, धान बिजहा के पुरता होगे।2
गरुआ ल खवाबो काला, पैरा बर लुलवाय ल होगे ।।
//झनपरै झनपरै, कहत रहीगेव फेर आसों तको दुकाल होगे।
*बोरवाले के बोर सुखागे, पानी ह अड़बड़ दुरिहागे।2
धार ह निमगा पातर होगे, चारो कोती ले काल होगे।
//झन परै, झन परै कहत रहीगेव,फेर ऑसों तको दुकाल होगे।।
चना गहुँ ह जमीच नही , इहु फसल ह थामहिच नही।2
का करवँ सबे मति हरागे, खेती ह जंजाल होंगे।
//झन परै, झन परै कहत रहीगेव,फेर ऑसों तको दुकाल होगे।।
*तरिया म पानी कमती दिखथे, नहाई खोरई ल करबो कइसे।2
गरमी म गुजर होहि कइसे, सबले बड़े ए सवाल होगे।2
//झन परै, झन परै कहत रहीगेव,फेर ऑसों तको दुकाल होगे।।
@ आशुतोष साहू, ग्राम पोस्ट नारायणपुर,
नवागढ़,जिला बेमेतरा।
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