छेरछेरा पुन्नी के मेला

जूनी मेला , नवागढ़,जिला बेमेतरा
पर कविता
*पुन्नी के मेला*
छेरछेरा पुन्नी के ये मेला,
बड़ निक लागथे मोला,
दुरिहा दुरिहा ले आदमी आथे,
भीड़ बडहाथे,
कोनो एला लेथे , कोनो ओला लेथे ,
कोनो खिलौना, कोनो कुसियार लेथे,
कोनो बदना के सेती कथा कराथे,
त कोनो लइका के झालर उतरवाथे,
फेर जग के हवन कुंड ले निकलइया धूं गिया,
मंतर के आरो,
मन ला मोहि लेथे,

लोगन मन डुबकइया ले लेके,
कइसन नाहवत हे, ठिठुरत हे,
जइसे जाड़ नईच ए,
कतको   नरियर मेल्अत हे,
कतको तरैया म झोकत हे,
जइसे आस्था ह,
मतलाहा पानी ला गंगाजल बना देहे,

जइसे जइसे, बेरा चढत हे,
भीड़ बाढ़त हे,
कोनो सैकिल, कोनो रेंगत,
कोनो बइलागाड़ी, कोनो टेक्टर,
म भर भर लावत हे,
चारो कोती, मनखे मनखे अउ मनखेच नजर आवत हे...
@आशुतोष साहू@

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