लो आया फागुन

महुआ की मादकता,से महके उपवन,
पलाश की लाली, से ललियाया भुवन,
      लो आया फागुन...     लो आया फागुन...

आमराई सजी बौरों से,जैसे नई दुलहन।
कूके कोयल ,फ़ाग गीतों से गुंजा है मन।
            लो आया फागुन....   लो आया फागुन...

बहकी बहकी-सी, चली है पवन।
कंटीले वृक्षों में भी आये सुमन।
              लो आया फागुन .....लो आया फागुन...

पिले हुए पात, मिला नव जीवन,
ज्यो लगे हल्दी, मिले नव बन्धन।
             लो आया फागुन...... लो आया फागुन...
मुख पुते गुलाल, रंग भीगा हर तन
पिचकारी धर घूमे ,गली गली लरिकन...
              लो आया फागुन......लो आया फागुन...
बजे बाजे औ',फ़ाग गीतों से गुंजा  गगन,
धरे गुलाल, टोली बनाय, सब करें भ्रमण।
             लो आया फागुन....लो आया फागुन...
मेरी होरी तब ही मने  ,साजन
तू जो पिचकारी से, भिगोए मेरा तन।
              लो आया फागुन..लो आया फागुन..

©आशुतोष साहू,
नारायणपुर, तह-नवागढ़,
जिला-बेमेतरा छ. ग.
9589778866

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट