आज सुरहुत्ति ए
आज सुरहुत्ति ए,
अंधियारी रात म,
दिया मन टिमटिमतिमावत हे।
सुआ गावइया माई लोगिन मन के आरो,
इहाँ तक ले आवत हे...
आज सुरहुत्ति ए,
अंधियारी रात म,
लइका मन,
दिया ल अमरावत हे।
कतको लइका चिन्हाथे,
अउ कतको नई चिन्हावत हे।
आज सुरहुत्ति ए,
आज संझा के बेरा,
मैं गे रहेंव अपन वो खेत म,
अउ रख आएंव दिया।
खेत म,
अउ आमा पेड़ म,
जिखर ले मोर भेंट
साल म,
दुए चार घव होथे।
@आशुतोष साहू
नारायणपुर, नवागढ़
जिला बेमेतरा
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