दारू के ब्याधी
*दारू के ब्याधि*
*एक ब्याधि छत्तीसगढ़ ल,अपन शिकार बनावथे।
मनखे ह पिथे ओला फेर,मनखे ल ओ ह खावथे ।।
*हाथ गोड पिराये के कोनो,दवई एला बतावाथे ।
कोनों एला पेट भर पीके ,कि इंहा मतावाथे।।
*लोग- लइका रद्दा देखे,भात इंहा जुड़ावथे।
घर के सियान कतका बेर म,लड़भड़ लड़भड़ आवथे।।
* जब आदी हो जाथे त,भट्ठी म लइन लगावथे।
पिये बिन चैन नई परे,हाथ गोड कंपकँपावथे।।
*पी डरिस तिहा फटफटी,अबड़े इहां कुदावाथे।
कतको झन, नई सम्हलावे त,गाड़ी सुद्धा बोजवत हे।।
*दारू झगरा के उखेनी,मंता ल ए भोगावथे।
मन के घुरवा ल उझेल,पाप ल ए ह उफलावथे ।
*छट्ठी म जाबे त दारू, बिहाव म दारू पियावथे।
छट्ठी के रमायन ह, कतका जल्दी नंदावत हे।
*बड़हर मन दारू पीके, कंगला इहां कहावथे।
दारू जुआ के चक्कर म, पूंजी ल अपन उडावत हे।
*भाई भाई अउ मितान ल, बैरी ए ह बनावथे।
सम्हलव भाई बहुत होगे,समय हमला समझावाथे।।
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✍🏻@आशुतोष साहू@
ग्राम नारायणपुर (नांदघाट)
विकासखंड नवागढ़ जिला बेमेतरा।
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