जिनगी के संगी

# जिनगी के संगी
*संगवारी तै झन  रिसाय कर,
रिसाथच तजिनगी अंधियार लागथे।

*तोर हांसी हावय चंदैनी कस,
हांसथच त जिनगी  उजियार लागथे।

* तै रहिथस त, सादा दिन ह घलो,
संगी ,मोला परब तिहार लागथे।

* संगी तै झन गांव जाए कर,
तोर बिन सुन्ना सुन्ना घर दुआर लागथे।

*कइसन सिरजाये हे सरजईया ह ,
माटी म मोये हे, मया दुलार लागथे,

*तोर बोली लागथे मीठ कोइली कस,
काया मउरे आमा डार लागथे।

*जतन ले लगावथस,आँखी म काजर,
करत हवस कटार म धार लागथे।

*अतेक सुग्घर हस संगी बतांव काला,
नई करे ल लागय सिंगार लागथे।

*मांग म जब तै भरथस सेंदुर ,
रंग फुलेफुले परसा के डार लागथे।

*पांव रचाथस जब तै महुर,
मोर दिल म लिखत हावस प्यार लागथे।

*संझा चीला बनाथस जेन दिन,
नई करेल लगे, रतिहा अहार लागथे ।

*बहुत काम के जिनिस ए,मोबाइल ह फेर,
मोला  लड़ई के हथियार लागथे।

*कतको गोठियाथव, अघावव नही,
तोर पिरीत ह , मीठ कुसियार लागथे।

© आशुतोष साहू

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