हे तेज के अनन्त श्रोत..
हे तेज के अनन्त श्रोत,दे दो मुझे भी कुछ ओज।
तुम बिन निस्तेज पड़ा हु,कृपा करो हे अनन्त श्रोत।
आज शक्ति कम है बाहों में, विजय की आशा कम है।
जीवन फंसा विकट राहों में,जीवन की अभिलाषा कम है।
इसलिये स्मरण कर रहा, भक्त का उद्धार करना।
जो भूल सारी क्षमा करके, नैय्या मेरी पार करना।।
तुम दया सागर कृपालु, देते ही रहना प्रेरणा।
पार्थ को जैसे दिखया, मेरा भी मार्गदर्शन करना।
जो है दान तुमने दिया, तेरी है जीवन की हर स्वांस,
श्रम था मेरा मैने किया, आगे तुझ पर है विश्वास।
अब तक तुमने तारा है, आगे भी तुम ही तारोगे।
अब तक स्नेह है वारा, आगे भी तुम ही उबारोगे।
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