मुझ पर हँसते हैं सब

मुझ पर हँसते हैं सब,
कोई छुप के,कोई सामने,जाने कब कब,
मुझ पर हंसते हैं सब।
क्यों कि मैं एक साधारण आदमी हूँ,
मुझमें की ऐब हैं,
बुराईयां हैं,
लेकिन वो भी तो बुराइयों से,
बचें नहीं हैं,
हर जगह सही नही हैं,
जो भी हो तुमसे ,
और चंद लोगों से कह पाता हूँ,
दिल की बात,
क्योँकि तुम मेरी डायरी हो,
सिर्फ मेरी हो,
तुम किसी से कुछ नही कहोगी।

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