लइकापन के सुरता

# लइका पन के सुरता

*लइकापन के  सुरता आथे,
मन म अब्बड़ खुसी अमाथे,
ओ दिन बादर अउ नइ लहुटय,
काबर ?कहि के पछताथे।

मोर गांव के रुख राई,
सुरता आथे तोर सुघराई,
हरहर हरहर,बाजे पीपर,
जब चले पवन पुरवाई।

सुतजव सुतजव जम्मो कहय,
फेर आँखी म नींद नई आय
पोप पोप फेर बाजे लागिस,
लागथे बरफ वाला ह आय।

कोसा खोज खोज के राखन,
ओखर फेर बरफ ल खान,
नइ रहय त अठन्नी वाले,
बरफ ल खाके मुँह रचान।

आमा पेड़े पेड़ रहय,
मंझनिया सब लइका जाय,
पेड़ म चढ़ के कोनो टोरय,
कोनो कोहा पथरा बरसाय।

आमा पेड़ हमन चढ़न,
कच्चा कच्चा आमा खान,
कड़कड़ ले अम्मठ रहय,
नून लगाके चाबते जान।

तरिया पार रहय एक ठन,
अमली रुख जुन्ना जबड़जन,
कुरमा उलहा उलहा आवय,
अमसुर अमसुर खावन सब झन।

उही म छू छुआल खेलन,
ए डारा ओ डारा फलगन,
गिरे के खतरा रहय तभो,
खेले ल  हमन नइ छोड़न,

कुरमा लावय बहिनीमन,
फुले फूल मनभावन,
सुग्घर ओखर चटनी पिसय,
बोरे संग  खावन सब झन,

एक खार अबड़े बोइर रहय,
किसम किसम के सबे फरय,
कोनो मीठ, कोनो अम्मठ
सब झन बिन बिन खोइला करय।

खेत खार म बम्हरिच बम्हरी,
बिनन झुनझुनी, ओखर तरी
खोज खोज के लासा लान
बनावन गोंद बस्सावय भारी।

परछी म पारन कोयला के डांड़ी,
पासा बनय संडउवा काड़ी,
अउ नही त चिचोल बीजा,
तिरी-पासा खेलन  चार गड़ी।

केंवटिन बेचय लाड़ू मुर्रा,
बईठ के ओ ह एक ठन चौरा,
धान के बलदा मुर्रा दय,
जावन सबझन उत्ता धुर्रा,

को जनि ओ कइसे बनाय,
मुर्रा गऊकी!अबड़ मिठाय,
दुकान म अब मिलथे फेर,
ओखर संग म नई आय,

मोर जहुरिया संगी संगवारी,
आथे तुंहर सुरता भारी,
पेट के कारन बाहिर निकलेंन,
फेर मिलबो जब आही देवारी,

© आशुतोष साहू
नारायणपुर( धनौरा) नवागढ़
जिला बेमेतरा छ. ग.
मो. 9589778866

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