# जिनगी दु बोल माया के गोठिया ले, इही जिनगी ए, बईठ मन के बात बता ले, इही जिनगी ए, को जानि कब टूट जाहि, जिनगी के डोरी ह, मैन के पतंग बने उड़ा ले इही जिनगी ए,
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें