सरसती बन्दना

#  माई सरसती लइका मन ल..
माई सरसती लइका मन ल, सुग्घर ज्ञान देदे वो।
कोनो ल बिद्या, कोनो ल संगीत कला के दान दे वो।

मिल जुलके रहय सबो,सुमति उंखर बाढ़य।
खावय खेलै संगे संग,  ध्यान उंखर बाढ़य।
अच्छई अउ बुरई के पहचान देदे वो।
माई सरसती लइका मन ल, सुग्घर ज्ञान देदे वो।

निराशा के भंवर ले इनला ,तहि ह बचाबे।
जिनगी के अंधियार रद्दा म अंजोर तै देखाबे ।
हिम्मत झन हारै , अइसे बरदान देदे वो।
माई सरसती लइका मन ल, सुग्घर ज्ञान देदे वो।

नवां नवां खोज करै,कुछु नवां करके दिखावै,
नकल ले इमन दुरिहा रहैं, अपन बुद्धि ल अजमावें।
भारत के नाव ल ऊंचा करै, अइसे गुनवान देदे वो।
माई सरसती लइका मन ल, सुग्घर ज्ञान देदे वो।।

@आशुतोष साहू
नारायणपुर,
नवागढ़(बेमेतरा)

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