पत्नि के लिए

पत्नी के लिए
धूप में तुम छांव हो
ठंड में अलाव हो,
जीवन नदी, तुम नाव हो,
संसार सूना, तुम गांव हो,

प्रेम की तुम इत्र हो
सौंदर्य का मोहक चित्र हो,
डांटती हो विचित्र हो,
पर तुम ही मेरी मित्र हो,

प्रेम की परिभाषा हो,
जीवन की नवआशा हो,

घर की हंसी ठिठोली हो,
खट्टी मीठी गोली हो,
अम्मा की तुम सहेली हो
वो परम्परा, तुम विचार नवेली हो,

पिता का वरदान हो
घर तुम मान हो,
अंधेरे में दीपक हो,
तुम मेरी समीक्षक हो,

मैं शिव तुम उमा हो,
मैं क्रोध तुम क्षमा हो,
तुम मेरा संबल हो,
मैं नदी तुम जल हो,

हांथों में हांथ हो,
सदा साथ साथ हों।
ऐसा शुभ संयोग हो
कभी न वियोग हो।

@आशुतोष साहू
नवागढ़ बेमेतरा

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