मैं अपूर्ण हूँ तुम बिन..
मैं अपूर्ण हूँ तुम बिन,
तुम मुझमें हो, फिर भी अपूर्ण हूँ।
मैं ढूंढता हूँ, तुम्हें रात दिन,
तुम मुझे नही मिले मुझमें,इसलिए अपूर्ण हूँ।
जिस दिन तुम मुझे मिल जाओगे,
मैं तुममें मिल जाऊंगा,हमेशा के लिए,
जैसे सरिता सागर में मिल जाती है,
और सागर बन जाती है....
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