कब के जोहत,जुडागे मोर तरसत मन, गजब दिन म , गिरीस पानी अइसन, किरपा ल प्रभु अइसने बना के राखबे, दूकाल के मुँह ल अब झन हम देखन। -आशुतोष साहू
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