सावन की हरियाली

सावन की हरियाली

वसंत तुम होगे भले ही ऋतुराज,
मुझे तो भाती है सावन की हरियाली।
बारिश की रिमझिम में ,जैसे हल खुशी के गीत लिखते हैं,
हवा में पेड़ों के साथ झूमती खुशहाली।
  - मुझे तो...हरियाली।
  फुदक फुदक कर पानी झड़ाती ये नन्ही चिड़िया,
इन्हें पनाह देती हरी हरी डाली।
मुझे तो... हरियाली।
ये गुलाब जो कांटा बन गया था जेठ की तपिश में,
उनके नए फूलों की धुली धुली लाली।
मुझे तो भाती है सावन की हरियाली।
जब फुलचुहि चहकती है अनार से,
और गौरैया बुलाती है घर से,
यूं लगता है किसी ने डाली हो,
कानो में शहद की प्याली।
मुझे.....हरियाली।
ढेखरों पर चढ़ चुकी सेम, बढ़ा के हाथ अब है
मुनगे के डालों को छूने वाली।
मुझे तो भाती... हरियाली।

©आशुतोष साहु
        नारायणपुर*(नांदघाट)

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