जात रहेंव ससुरार
जात रहेंव गाँव,मैं संझा के बेरा,
रद्दा म छेकलीन,धुंका पानी अउ गर्रा।
बिजली चमके झमाझम,बादर गड़गडाय,
थोकिन म अतका जल्दी मौसम कइसे बनाय,
जतके पानी ततके गर्रा, पानी ह उड़ाय,
पानी म कुछू दिखय नही,नजर धुँधरा छाय,
धन तो ठंउका, एक आसरा रद्दा म घर पागेन,
नइ पातेन आसरा त अभी सबझन फिल जातेन,
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