इच्छा
# इच्छा-कामना
*चाहो जिस वस्तु को ,वो न मिले तो मन अधीर होता है।
वही वस्तु मिले आप ही,न मोल उसका तो फिर होता है।
*चाहना,कल्पना,पाना,खोना,यह सब ही जीवन के रंग हैं।
हर चाह, दुख-दर्द सभी बातें,मिट जाते, समय के संग हैं।
*जीवन नदी सी हम बहते जाते,अपना कुछ वश न होता,
नगर जो पीछे छूट जाते,फिर न आते, मानुस रहता रोता,
*अधूरापन जीवन का लक्षण, पूर्णता कथाओं में होती।
इच्छा करना मन का गुण,जो अपूर्णता का अनुभव देती।
*कामनाएं ही जीवन की प्रेरणा,जीवन को ये गति देते हैं।बचपन,यौवन में अति कामना ,जो सबको उन्नति देते हैं।
*पर बुढ़ापे के आते-आते इच्छाओं का क्षय हो जाता है।सब इच्छाओं को त्याग कर,जीवन ईश्वर मय हो जाता है।
©आशुतोष साहू
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