बिन मौसम बरसा
#बिन मौसम बरसा
ऊपर वाले देवत हच पानी,कुछु सोंच के देवत होबे।
तिपय हवय भुइँया अड़बड़,कहिके जुडोवत होबे।
बरसा के दिन म धान म रोए,चना गहुँ म तक अब रोबे।
किसमत म खोये के होहि, त पावत पावत खोबे।
जांगर के चुम्बक म पइसा, आही झन तँय रोबे।
जांगर ल कोनो नई लुटे सकय,इही बिजहा ल तैं बोंबे।
©आशुतोष साहू
नारायणपुर
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