तुम जो नहीं हो

#तुम जो नही हो..

पागल मन हुआ जाता,
पीर ये ना सहा जाता,
मन को कुछ भी न भाता,
                 तुम जो नही हो।

प्रिय तुम मेरी आत्मा हो,
देह केवल, तुम नही जो,
जैसे पुष्प, बिन सुगंध हो,
                   तुम जो नहीं हो।

तुम्हारी सुध में खोया रहता,
जागा जागा सोया रहता,
यह बात किसी से, कह न पाता,
                       तुम जो नही हो।
प्रेम की अगन में तपता,
मन तुम्हारा नाम जपता,
तुममें ही हर पल खपता,
                       तुम जो नही हो।

तुमसे मुझे इतना लगाव,
दूरी से जागा यह भाव,
विरह धूंप में खोजूं छाँव,
                        तुम जो नहीं हो।

©आशुतोष साहू,
नारायणपुर ( मारो)


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