बाबाओं पर

# बाबाओ पर,

*भक्त सबको अंधा बना रक्खा है।
  धर्म को बस धंधा बना रक्खा है।

पाखंड का जिसने,जीवन भर विरोध किया,
चलाने बंदूक,उसी को कन्धा बना रक्खा है।

खुद ये कितने शातिर मक्कार ठग हैं।
सीधे साधे लोगो को अपना बंदा बना रखा है।

बन के शिकारी,भावनाओं का शिकार करते है,
धरम को , शिकार का फंदा बना रक्खा है।

ज्ञान के दो शब्द बोल कर बाबा कहलाते हैं।
लोगों को, अकल का अंधा बना रक्खा है।

पहले बाबा बनते है ,फिर भगवान बन जाते है,
इस देश के बाबाओं ने, रिवाज गन्दा बना रक्खा है।

दया का नाम है तू,कितना आसान है तू,
तेरे वकीलों ने तुझे मुश्किल ज्यादा बना रक्खा है।।

©आशुतोष साहू

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