नर्क
नर्क
सुना था,
स्वर्ग और नर्क ,
दुनिया में है,
मगर देख भी लिया,नर्क
हर तरफ से एक सी खबरें,
मासूम बच्चियों की नोची हुई लाशें,
तन बदन में ,
एक सिहरन सी दौड़ जाती है,
मगर इनकी इंसानियत,
क्यों मर जाती है?
हवस की भेंट चढ़ रही,
बच्चियां ,
इतनी असुरक्षित,
होती जा रहीं हैं कि,
लगता है कहिं,
दुनिया में,
ऊपर वाला,
डरकर
बच्चियां भेजना ही,
बन्द न कर दे।
©आशुतोष साहू
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें