कठुआ के पीड़िता के नाम

# कठुआ की पीड़िता के नाम

सुन कर ये अन्याय, रहूँ तो चुप रहूं कैसे।
द्रवित हो रहा मन,तुमने पीड़ा सही कैसे।
असिफ़ा तुम अनजान थी जात और धरम से।
इंसानियत की थी तुम बेटी,झुके सिर शरम से।
तेरी मासूमियत,उम्र तक का न लिहाज किया।
भगवान के घर  को भी अपवित्र आज किया।
हद तो यह है कि ,पुलिसवाले भी आरोपी हैं।
जिन पर भार रक्षा की,साथ देने के  पापी हैं।
अब बेटी का बाप होना,न खतरे से खाली है।
लेना बाप से बदला तो,समझो बेटी उठने वाली है।
सियासतदानों शर्म करो ,कुछ तो जगह छोड़ो।
ऐसी संजीदा बातों में भी न सियासत  घुसेड़ो।
ऐसे अनाचारियों से पुरुषत्व इनकी छीन लो।
इनके एक एक पाप का हिसाब गिन गिन लो।

©आशुतोष साहू

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