#वही कवि है

# वही कवि है

मन की जो व्यथा कह दे,
जीवन की जो कथा कह दे।
अपने मन की भी कहे,
सबके मन मे जो था, कह दे।
वही कवि है....

झाँक डाले झुरमुटों में,
घटियो और पर्बतों में,
भावना के रंग भर दे,
निर्जीव पत्थर के बुतों में,
वही कवि है...

कल्पना के पंख लेकर,
उड़े गगन से ऊपर,
सूक्ष्म दृष्टि पायी जिसने,
सत्य कहे निडर होकर,
वही कवि है..

निराशा से मुक्त कर दे,
शव में जो स्वास भर दे,
पापियों से लड़ सके सब,
ऐसा नव विश्वास भर दे,
वही कवि है..

सबके मन मे प्रीति अगन,
विरह वेदना व्याकुल मन,
कह न सके लोग लेकिन,
वो कह जाए जिसका लेखन
वही कवि है....

©आशुतोष साहू
नवागढ़(बेमेतरा)छ

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