मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे
# मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे
मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे
आ चुका है दूर इतना,
असंभव पीछे लौटना,
खिड़की जो न खुलती,
तू क्यूँ कर खोलता उसे
मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे
अजीब दुनिया है,
ये बदल जाती है,
बातें बीत जाती,
और याद आती हैं,
जाकर उन गलियों में,
क्यूँ ढूंढता उसे,
मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे,
सपने सी लगती है,
धुंधली होती यादें,
करीब है दिल के,
मिटने उन्हें ना दें,
दरकती तसवीर है,
क्यूँ जोड़ता उसे,
मन मेरे क्यूँ न भूलता उसे
©आशुतोष साहू
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