लालचहा मनखे
# ललचहा मनखे
*गाँव म,
रहीस परिया,
कतका कन
लालचहा मनखे मन,
सब भुइँया ल चपल डरिन,
अब मरघटिया बर तक,
नइ बाँचीच भुइँया,
सबले जादा मरना,
होगे गाय गरुवा मन के,
जे बंधाय रहिथे ,
दिन रात गेरवा म,
कभू कोठा म,
कभू खोर म,
रकठी रकठी गाय,
चरे बर नइ जाय,
पगुरात रहिथे सुक्खा पैरा,
*पहिली दिखय,
मेंढ़ म,
बीच खेत म
बम्हरी,
फेर अब
खार मन दुच्छा दिखथे,
जइसे होगे खाली हांथ,
ललचहा मनखेमन,
सब ल पइसा खातीर,
कटवा,
गाड़ी म भर,
बरो दिच,
*मोर घर के तीर म,
सड़क हावय,
पहली तिरे तीर,
ओरी ओर,
रहय करंज के,
कतको पेड़,
फेर अब दिखथे,
ठूठवा ठूठवा,
बिन गड़हन के रुख,
काट डरिस कोनो,
स्वार्थ म ,
कोनो धरथे कहिके,
बिजली तार म,
अपन के देखइया मनखे
*जेठ म पानी बर,
तरसथे,
तभो गरमी धान,
बोयें बर नइ चेते,
करत हे ,
प्रकृति ले
खेलवारी,
पानी के फसल ल,
गरमी म बोंके
लालचहा मनखे...
©आशुतोष साहू
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