पश्चाताप

# पश्चाताप
पश्चाताप के आंसू, मन के मैल को धोते हैं।
सच्चे मन से मांगे तो,सब ही क्षमा कर देते हैं।
भूल स्वीकारना भी, बड़े हिम्मत की बात है।
पड़ेगा सिर झुकाना सोंच, बहुतेरे सकुचात हैं।
इंसान की आदत है ये, वो गलतियों का पुतला है।
स्वीकार लो दंड या क्षमा जो भी बदले में मिला है।
पर सच कह देने से, मन हल्का हो जाता है।
उलझन मन की दूर होती, मन शांति पाता है।

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