महिला दिवस
# महिला दिवस
*मनाना महिला दिवस, नारी दुर्दशा का प्रतीक है।
देवी कहना,दासी रहना,ये पाखंड क्या ठीक है।
*पिंजरे के पँछी-सी नारी, मिठे गीत सुनाती है,
जिसके पंख न कतरे जाएं, तारे जीत के आती है।
*पिंजरा चाहे सोने का हो, कब किसे भाया है?
आजादी नारी जीवन मे भी, धीरे धीरे आया है।
*मतदान का अधिकार,दिया बहुत विलंब से।
पाश्चात्य दुनिया मे जीती, पुरुषवादी दम्भ से।
*जिसके पिता परिवार ने, सम समझा शिक्षा दिया।
पुत्र से बढ़कर पुत्री ने, नाम सदा ऊंचा किया।
*पर गरीब की बेटी, सौ दुश्मनों से लड़ती है।
पाने जाए शिक्षा, तो गंदी नजर पड़ती है।
*निर्भया का नाम दे कर, समाज साहस है बढ़ाता।
भेड़ियों-से मानुषी पर, हमला अक्सर है डराता।
*नारी केवल देह नही ,क्यूँ शिक्षा इन्हें न सीखा पाता।
सज्जन इन्हें बना पाता, सुकर्म मार्ग दिखा पाता।
*युवा गलत राह यदि ,समाज की ये हार है,
समाज असफल है और, ऐसी शिक्षा बेकार है।
*नारी आधी आबादी है, इनका समान विकास हो
अपना देश दुनिया मे, पहला हो ,ऐसा प्रयास हो।
© आशुतोष साहू
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