अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
अपनी भाषा को त्याग, विदेशी स्वीकर गए।
हिंदी जानने वाले को अब,अनपढ़ नीरा सब मान गए,
पढ़ने की माध्यम हो अंग्रेजी ,हिंदी वाले मांग गए।
अपना सारा प्रेम हम अंग्रेजी पर वार गये,
~अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
शासन तमासबीन बनी, सब देखती चुपचाप है,
'मातृभाषा में शिक्षा दो' का केवल करती जाप है।
बच्चो का अधिकार है ये,उनका हक ये मार गए।
दूसरी भाषा बनाना था,पर पहली ये स्वीकार गए।
गोरी की चाहत में ,अपनी माँ को दुत्कार गए।
~अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
जो विदेशी हमलावर आए,अपनी भाषा सिखा गए।
कालिदास की भूमि से, संस्कृत को मिटा के दिखा गए।
हिंदी को भी मिटा देंगे, आगे तुम देखते रहना।
नही बताया, नही चेताया, ये बात फिर मत कहना।
संस्कृति के गालों पर, वे तमाचा मार गए।
~अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
पटरानी से दासी बनी, हिंदी उपेक्षित हो रही।
अंग्रेजी माध्यम से जनता ,अब शिक्षित हो रही।
चीन,रूस,फ्रांस,जर्मनी सब अपनी भाषा पढ़ते हैं।
अपनी भाषा पढ़ कर वे ,विकास की परिभाषा गढ़ते है।
भारत वाले अब तक, तेरी मेरी के ना पार गए।
~अंग्रेजो से जीत गए, अंग्रेजी से हार गए।
©आशुतोष साहू,
नारायणपुर बेमेतरा
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें