बबा

# बबा
झन करव झगरा,झन करव ठेनी, बबा समझाय
बाढ़थे बात त,पड़ जथे लेनी के देनी, बबा कहय,
लड़ाई म हे बिगाड़,चुप सही,मजा नही।
चुप सही मजा नही,मोर बबा,कहय...

फेर डोकरी दाई,संग एक्को नई पटय,
सुनके ओखर ताना ,दाँत पिसय,कीटकीटाय।
देख के ए सब,जम्मो लइका,हांसय,खुलखुलाय,
ओमन कहय,अतेक जिनगी,कइसे इमन पहाय,
~चुप सही मजा नही,मोर बबा,कहय..

जब परछी म, खेलय,लइके लइका जुरियाय
खोली म सुते बबा ह जाग जाय, मंतियाय ,
धरके अपन सटका ल ,मारे ल कुदाय,
~चुप सही मजा नही,मोर बबा,कहय...

पारा बस्ती ह,नियाव बर बबा ल बलाय,
फेर ,बांटा के दिन,ओखर सियानी,काम नई आय,
कोनो नई मानय, झगरा ओ दिन नइ बुताय,
ओला कोनो बेटा,सोझ नइ बताय,
~चुप सही मजा नही,मोर बबा,कहय...

बनी-भुति,करके, अतेक खेती बनाय,
करिच अबड़ खेती, थोरको नई सुरताय,
सियान होगे रहय तभो,रेंगें रेंगें खेत डहर जाय,
नइ करय बुता त ओखर हाथ गोड़ पिराय,
~चुप सही मजा नही,मोर बबा,कहय...

©आशुतोष साहू,
नवागढ़(बेमेतरा)

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