नक्सली

हम सुरक्षित उनकी बदौलत,
हुवी उनकी कैसी ये हालत,
हमारी विचारों के वे रक्षक,
होम दिया अपना जीवन तक,

अपने ही देश के अंदर लड़ाई,
चिंगारी ये कहां से आयी,
उन विचारों का दमन हो,
दावानल का शीघ्र शमन हो,

बनबेर से ये आतंकी,
जड़ निकले बिन नही मुक्ति,
जेएनयू-डीयू बैठे इनके माली,
बोले बोली मानवता वाली,

विचारों की ये लड़ाई,
क्रांति इनकी खून से आई,
लोकतंत्र के ये दुश्मन हैं,
आश्रय इनके बीहड़ वन हैं।

नाम मजदूरों का लेके,
अबोधो को बंदूक देके,
मानवता को लज्जित करते,
पूंजीवाद के शत्रु,स्वयं धन संचित करते,

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